मेरे ख्वाब
मेरे ख्वाब तुमसे शुरू हो के तुमपे ही ख़तम होते है पर तुम सिर्फ मेरे ख्वाब में आते हो, हकीकत में नहीं। दिल को आज भी तुम्हारा इंतज़ार है दिल आज भी तुम्हारी एक झलक का दीवाना है दिल जनता है की तुम इसकी किस्मत में नहीं दिल फिर भी ना जाने क्यों तुम्हारा ही इंतज़ार करता है। शोर में जिसका नाम लिया वो तुम हो भीड़ में जिसका चेहरा देखा वो तुम हो यूँ तो इस ज़िन्दगी में लाखों मिले हमे फिर भी दिल ने जिसकी आरज़ू की वो तुम हो। हमारा मिलना कोई इत्तेफाक नहीं था हमारा मिलना तो रब की मर्ज़ी थी हमारा मिलकर बिछड़ना यह भी रब की ही मर्ज़ी था।