बारिश
बारिशो की बूंदों सी है कुछ तेरा मिलना आंखों को एक सुकून दे जाती है, खुलती है जब आंखे तो तू नही हवा में बस तेरी खुशबू रह जाती है, धूप में परछाई की तरह तेरे पीछे, ना जाने इस बदली में कही गुम हो जाती है, हकीकत समझने की भूल करे दिल उससे पहले आंखों से ख्वाब ओझिल हो जाती है।।