ये गलियां आज भी हमारी अधूरी दास्तां बयां करती हैं। जिसे पूरा करने की चाह में मैं आज भी यहां आ जाया करती हूं। मगर तुझे ना पाकर खाली हाथ बस पुरानी यादें लिए लौट जाती हूं।।
दिल के झरोखे में तेरी तस्वीर तो है। लेकिन किस्मत की लकीर में तेरा नाम नहीं चाह कर भी हम इन लकीरों को बदल ना सके। इसी गमे एहसास में हम ज़िन्दगी जिए जा रहे हैं।।
वो भी क्या वक़्त था जब तेरी कविताएं मुझसे शुरू होकर मुझ पर ही खत्म होती थी। जबसे तू हमें छोड़ कर गया हमने सारी कविताएं तुझ पर लिख डाली। पर तू बेदर्द अब किसी और के लिए कविताएं लिखता है।।
एक पल के लिए नहीं ज़िन्दगी भर के लिए दिल में बसे हो तुम अब ये मेरी बदकिस्मती है या खुश नसीबी के कोशिशें तो बहुत की हमने मगर तुम्हे यह एहसास दिला ना सके
हमारी तो सुबह भी दोस्तों से होती है और शाम भी ज़माना लाख कहे की आजकल दोस्ती मतलब की होती है लेकिन ज़माने को कौन समझाए की अगर दोस्त आप जैसे हो तो पत्थर को भी दोस्ती करना सीखा दें
एक मुद्दत बाद हमें खुशी महसूस हुई जब आप जैसे दोस्त बहार बनके ज़िन्दगी में महक ले आए अब तो बिना आपके ज़िन्दगी बेरंग सी लगती है बस रब से एक ही दुआ है हमारी की चाहे जान चली जाए हमारी छूट ना कभी दोस्ती हमारी