हमारी तो सुबह भी दोस्तों से होती है और शाम भी ज़माना लाख कहे की आजकल दोस्ती मतलब की होती है लेकिन ज़माने को कौन समझाए की अगर दोस्त आप जैसे हो तो पत्थर को भी दोस्ती करना सीखा दें

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