यह गालियां

ये गलियां आज भी हमारी अधूरी दास्तां बयां करती हैं। जिसे पूरा करने की चाह में मैं आज भी यहां आ जाया करती हूं। मगर तुझे ना पाकर खाली हाथ बस पुरानी यादें लिए लौट जाती हूं।।

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