आज भी नज़रें तेरे द्वार पर टिकाए रखती हूं।
इसी आस में की कभी तो तेरे दीदार होंगे।
मगर तूने भी बरसों से घर आना छोड़ दिया
हिन्दू होना पाप है?
किसी ने कहा अच्छा इंसान तो कोई भी नहीं फिर क्यों हिन्दू कुछ गलत करे तो उसको मौत की सज़ा देते हैं बुरा तो उन्होंने हमारे देवी देवताओं को भी बोला फिर क्यों मोहम्मद पर बुरा बोलने से शहर जलाते हैं हिन्दू की आस्था का मजाक बनाते है तो कुछ नहीं इनकी आस्था पर सवाल उठाओ तो दंगा फैलाते हैं हिंदू भी ना जाने कब इनके जैसा बनेगा ना जाने कब इनको इनके ही तरीक़े से जवाब देगा अब तक जो चुप्पी है यह सब उसकी का नतीज़ा है हिंदू अहिंसावादी है बस इसी का फायदा है
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