गुज़ार लेंगे जि़न्दगी यहीं गाँव के अपनत्व में

गुज़ार लेंगे जि़न्दगी यहीं गाँव के अपनत्व में
गांव से आए थे शहर के किस्मत चमक पड़ेगी
ये ना सोचा था कि भुख और बेबसी में जि़न्दगी रो पड़ेगी
सोचा था शायद खुद को और परिवार को बेहतर कल देंगे
लेकिन यह ना सोचा था बेहतर कल पर आज को खो देंगे
छोटे बच्चों को हाथ में लेकर सड़कों पर चलते हैं
यही सोचते हैं ना जाने क्यों गाँव को छोड़ते हैं
अब ना आएंगे लौट कर फिरसे इंसान शहरों में
यूँ ना होकर लाचार सड़कों पर चलेंगे धूप में
गुज़ार लेंगे जि़न्दगी यहीं गाँव के अपनत्व में
बच्चों को भी यहीं असली जि़न्दगी से जोड़ लेंगे
दो पैसा कम मिलेगा तो कोई गम नहीं
अपनो का साथ होगा यह भी कोई कम नहीं
ना होंगे फिरसे यूँ लाचार, भूखे और बेबस
ना होंगे फिरसे यूँ मासूम बच्चे धूप में सड़कों पर
ना पड़ेगी फिरसे यूँ धूप और बेबसी की मार अपनो पर
ना खाली पैर चलेंगे दिन और अपनो से मिलने को
गुज़ार लेंगे जि़न्दगी यहीं गाँव के अपनत्व में

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